What is Repo Rate: डिटेल में समझिए क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो

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RBI Governor New Repo Rate

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट (Repo Rate) को तत्काल प्रभाव से 40 आधार अंक बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने 2-4 मई के बीच हुई एक ऑफ-साइकिल बैठक में रेपो रेट को 40 आधार अंकों (बीपीएस) से बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया और इस कदम को उठाने के पीछे इन्फ्लेशन को नियंत्रित करना यह वजह बताया गया है।

इस बारे में बात करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इन्फ्लेशन, जियो पॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की कीमत और अन्य सामाग्रियों के बढ़ते दामों ने भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर किया है। कच्चे तेल की कीमत अस्थिर है और $ 100 प्रति बैरल से ऊपर है। दास ने यह भी कहा कि यूरोप के संघर्ष और निर्यातक द्वारा प्रतिबंध के कारण खाद्य तेल की कमी हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेपो रेट (Repo Rate), एसएलआर (LSR), सीआरआर (CRR) आदि जैसे शब्दों का क्या अर्थ है और यह कार्य कैसे करते हैं। यदि नहीं तो चलिए हम आपको इन सभी विषयों में एक-एक कर के जानकारी देते हैं। ये शब्द प्रतियोगी परीक्षा के लिहाज से तो महत्वपूर्ण हैं ही साथ ही हमारी जानकारी के लिए भी उतने ही जरूरी हैं।

रेपो रेट (Repo Rate) क्या है

आसान शब्दों में अगर बात हो तो रेपो रेट का मतलब है रिजर्व बैंक द्वारा अन्य बैकों को दिए जाने वाले कर्ज की दर। बैंक इस चार्ज से अपने ग्राहकों को लोन प्रदान करता है। रेपो रेट कम होने का अर्थ है कि ग्राहक अब कम दामों में भी होम लोन और व्हीकल लोन जैसे लोन के कर्ज के दर सस्ते हो जाएंगे।

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) क्या होता है

जैसा कि शब्द से ही अर्थ साफ है, इसका अर्थ उस रेट से है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी के लिक्विडिटी को नियंत्रित करता है। आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम को उसके पास जमा करा दे।

सीआरआर (Cash Reserve Ratio) क्या है

सीआरआर का अर्थ उस धन से है जो हर बैंक अपनी कुल नकदी का कुछ हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखता है।

एसएलआर (Statutory Liquidity Ratio) क्या है

नकदी के लिक्विडिटी को कंट्रोल में रखने के लिए एसएलआर का इस्तेमाल किया जाता है। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की लिक्विडिटी कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है।

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